आशा ताई की विदाई से थमी कविताओं की महफिल, ‘माटी मुक्तक महोत्सव’ स्थगित

प्रकाशित: 12 अप्रैल, 2026

हिंदी संगीत की जादुई आवाज, जिसे हम और आप ‘आशा ताई’ के नाम से जानते हैं, आज वो आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। आशा भोसले जी के निधन की खबर ने न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हर उस घर में मातम फैला दिया है जहाँ रेडियो पर उनके गाने बजते थे। यह खबर जैसे ही आई, कला और साहित्य के गलियारों में सन्नाटा पसर गया। इसी भारी मन के साथ यह फैसला लिया गया है कि आज होने वाले जश्न को रोक दिया जाए।

​आज यानी 12 अप्रैल को होने वाले ‘7वें माटी मुक्तक महोत्सव एवं कवि सम्मेलन’ को फिलहाल कैंसिल कर दिया गया है। आयोजकों ने एक स्वर में कहा है कि जब देश अपनी सबसे लाडली गायिका को विदा कर रहा हो, तब काव्य का उत्सव मनाना मुमकिन नहीं है। यह फैसला आशा ताई की विरासत और उनके सम्मान में लिया गया है

कविता प्रेमियों के लिए यह खबर थोड़ी मायूस करने वाली जरूर है, लेकिन संगीत जगत की इस अपूरणीय क्षति के सामने हर कोई नतमस्तक है।

आयोजन समिति की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि कार्यक्रम को सिर्फ ‘अगली सूचना’ तक के लिए टाला गया है। इसका मतलब है कि कविताओं ने शोक में मौन धारण कर लिया है। जैसे ही नई तारीख तय की जाएगी, इसकी जानकारी बाकायदा मुनादी कराकर या डिजिटल माध्यमों से आप तक पहुँचा दी जाएगी।

उड़नबाज की पूरी टीम की ओर से संगीत की इस महान साधिका को विनम्र श्रद्धांजलि। आशा जी के गीत हमारी यादों में हमेशा वैसे ही खनकते रहेंगे जैसे उनका ‘दम मारो दम’ या ‘इन आँखों की मस्ती’ आज भी कानों में मिश्री घोलता है।

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