बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के बीच उपजे तनावपूर्ण रिश्तों में अब सुधार की आहट सुनाई दे रही है। बांग्लादेश की नई सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। 8 अप्रैल को हुई इन उच्च स्तरीय बैठकों को कूटनीतिक हलकों में बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरान बांग्लादेश ने भारत के सामने अपनी ज़रूरतें तो रखीं ही, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का संवेदनशील मुद्दा भी एक बार फिर उठाया।
ऊर्जा और उर्वरक: संकट में साथी बनेगा भारत?
विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ ऊर्जा सहयोग पर लंबी चर्चा की। बांग्लादेश ने भारत से ईंधन (Fuel) और उर्वरक (Fertilizer) की आपूर्ति बढ़ाने का विशेष अनुरोध किया है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के अनुसार, हरदीप सिंह पुरी ने इस पर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि ईंधन आपूर्ति बढ़ाने की मांग पर “तत्काल और अनुकूल रूप से” विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि भारत पहले भी संकट के समय डीजल शिपमेंट भेजकर बांग्लादेश की मदद कर चुका है।
वीज़ा सेवाओं पर बड़ी राहत की उम्मीद
दोनों देशों के नागरिकों के लिए सबसे बड़ी खबर वीज़ा प्रक्रिया को लेकर है। खलीलुर रहमान ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ यात्रा प्रतिबंधों में छूट पर चर्चा की। वर्तमान में दोनों देशों के बीच वीज़ा सेवाएं लगभग ठप हैं। बैठक के बाद बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि भारत आने वाले हफ्तों में वीज़ा प्रक्रिया को आसान बनाने पर सहमत हो गया है। इसमें मेडिकल और बिजनेस वीज़ा को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे हज़ारों बांग्लादेशी नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर मंथन
विदेश मंत्री ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से भी मुलाकात की। इस बैठक में न केवल सुरक्षा से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों पर बात हुई, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
शेख हसीना का प्रत्यर्पण: पेंच अभी फंसा है
तमाम सकारात्मक चर्चाओं के बीच, बांग्लादेश की नई सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को फिर से मेज पर रखा है। हालांकि भारत ने इस पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिबद्धता नहीं जताई है, लेकिन खलीलुर रहमान का यह दौरा यह साफ करता है कि नई सरकार भारत के साथ संबंधों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय, व्यावहारिक सहयोग (Practical Cooperation) की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।