ईरान को पैसा दिया तो खैर नहीं, अमेरिकी नौसेना करेगी हर जहाज़ की नाकेबंदी

प्रकाशित: 12 अप्रैल, 2026
From White House Live

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जिस शांति की उम्मीद लगाई जा रही थी, वह रविवार सुबह होते-होते ‘युद्ध की धमकी’ में बदल गई है। अमेरिका और ईरान के बीच 20 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बेनतीजा खत्म होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अब अमेरिकी नौसेना हॉर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले हर उस जहाज़ को रोकेगी और उसकी तलाशी लेगी, जिसने ईरान को ‘टोल’ (टैक्स) दिया है।

वेंस का ‘नो डील’ और ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ धमाका

रविवार सुबह 6 बजे इस्लामाबाद के सेरेना होटल से बाहर निकलते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सिर्फ एक लाइन कही— “कोई समझौता नहीं हुआ है और हम वापस लौट रहे हैं।” इसके तुरंत बाद ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट की झड़ी लगा दी। ट्रंप ने लिखा कि बैठक में ज़्यादातर बातों पर तो सहमति बन गई थी, लेकिन जो सबसे ज़रूरी मुद्दा था ‘परमाणु’ उस पर ईरान अपनी ज़िद छोड़ने को तैयार नहीं है।

‘अवैध टोल दिया तो सुरक्षित रास्ता भूल जाओ’

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय जहाज़रानी (Shipping) कंपनियों और देशों को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने अपनी नौसेना को निर्देश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन जहाज़ों की नाकेबंदी की जाए जो ईरान को शुल्क चुका रहे हैं। ट्रंप ने दो टूक कहा:

“जो कोई भी ईरान को अवैध शुल्क देगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। और अगर किसी ईरानी ने हमारे या किसी शांतिपूर्ण जहाज़ पर गोली चलाई, तो उसे नरक भेज दिया जाएगा।”

हॉर्मुज़ स्ट्रेट में बारूदी सुरंगों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि अमेरिकी नौसेना अब हॉर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Sea Mines) को नष्ट करने का काम शुरू करने जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने रास्ता खोलने का वादा किया था, लेकिन जानबूझकर ऐसा नहीं किया, जिससे पूरी दुनिया में ‘अव्यवस्था और तकलीफ’ पैदा हुई है।

परमाणु ताक़त पर कोई समझौता नहीं

ट्रंप ने साफ किया कि जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुश्नर ने उन्हें पूरी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों को जारी रखना उस खतरे से बेहतर है कि “अस्थिर और अप्रत्याशित लोगों (ईरान)” के हाथ में परमाणु ताक़त चली जाए। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की टीम द्वारा की गई मध्यस्थता की सराहना की, लेकिन अंत में नतीजा ‘सिफर’ (Zero) ही रहा।

ट्रंप का यह ‘ब्लॉकैड’ (नाकेबंदी) प्लान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अगर हॉर्मुज़ स्ट्रेट में अमेरिकी नौसेना और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बीच टकराव होता है, तो तेल की कीमतें रॉकेट की तरह बढ़ सकती हैं। दुनिया अब एक ऐसे समुद्री युद्ध की कगार पर खड़ी है जहाँ टोल टैक्स भी ‘बारूद’ की गंध के साथ वसूला जाएगा।

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