अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने ‘रॉकस्टार’ अंदाज में नजर आए। ‘एयर फोर्स वन’ विमान में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने ईरान को लेकर वो बातें कह दीं, जो हेडलाइन में आग लगाने के लिए काफी हैं। ट्रंप का सीधा दावा है कि ईरान ऊपर से भले ही कड़ा दिख रहा हो, लेकिन अंदर से वो समझौते के लिए ‘छटपटा’ रहा है।
एआई (AI) से ‘झूठ’ परोस रहा है ईरान?
ट्रंप ने ईरान पर बड़ा आरोप लगाया कि वो एआई (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल करके गलत जानकारियां फैला रहा है। उन्होंने कुछ उदाहरण भी गिना दिए:
- मोजतबा खामेनेई के समर्थन में जुटी ‘हजारों’ की भीड़? बोले- ये सब एआई का कमाल है!
- “कामिकाज़ी बोट्स” वाले दावे? बोले- फेक हैं!
- यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हमला? बोले- ये तस्वीरें भी एआई की देन हैं!
हालांकि, जब सबूत की बात आई, तो ट्रंप ने अपने पुराने अंदाज में चुप्पी साध ली और कोई ठोस प्रूफ पेश नहीं किया।
“10 साल लग जाएंगे दोबारा खड़े होने में”
ईरान की हालत पर चुटकी लेते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने उन्हें इतना नुकसान पहुंचाया है कि अगर आज हम उन्हें छोड़ भी दें, तो उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में 10 साल लग जाएंगे। कूटनीतिक बातचीत पर ट्रंप बोले, “हम उनसे बात कर रहे हैं, वो करीब आ रहे हैं, लेकिन शायद अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं।”
उधर तेहरान ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने ट्रंप के इन दावों पर तुरंत ‘ठंडा पानी’ डाल दिया। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान ने न तो कभी युद्धविराम की मांग की है और न ही बातचीत की भीख मांगी है।
ट्रंप कह रहे हैं कि ईरान डरा हुआ है, ईरान कह रहा है कि वो झुका नहीं है। अब ये एआई का खेल है या असली कूटनीति का सस्पेंस, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ है, ट्रंप के आने के बाद मिडिल ईस्ट की बिसात पर मोहरे बहुत तेजी से घूम रहे हैं।